
महराजगंज। स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए दिव्या कॉलेज ऑफ हेल्थ साइंसेज़, महराजगंज (उ.प्र.) के फिजियोथेरेपी विभाग द्वारा केएमसी मेडिकल कॉलेज परिसर में “ड्राई नीडलिंग: मायोफेशियल पेन एवं ट्रिगर पॉइंट्स के लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। सुबह 9:30 बजे से सायं 5:00 बजे तक चले इस शैक्षणिक आयोजन में प्रदेश के विभिन्न संस्थानों से आए फिजियोथेरेपिस्ट, इंटर्न एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यशाला का मुख्य आकर्षण “मॉडर्न ड्राई नीडलिंग टेक्नीक्स फॉर मायोफेशियल पेन रिलीफ” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण रहा। मुख्य वक्ता डॉ. शिवम कटियार (पीटी) ने मायोफेशियल पेन सिंड्रोम, ट्रिगर पॉइंट्स की पहचान, ड्राई नीडलिंग के वैज्ञानिक आधार, संकेत (Indications), निषेध (Contraindications) तथा सुरक्षा मानकों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धति अपनाना अत्यंत आवश्यक है, जिससे उपचार अधिक सुरक्षित, प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी हो सके।
डॉ. कटियार ने हैंड्स-ऑन सेशन के माध्यम से प्रतिभागियों को विभिन्न मांसपेशीय क्षेत्रों में सटीक नीडल प्लेसमेंट, एसेप्टिक तकनीक तथा क्लिनिकल निर्णय-प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि सही तकनीक के प्रयोग से न केवल दर्द में कमी आती है, बल्कि रोगी की कार्यात्मक क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार संभव है।
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक श्री विनय कुमार श्रीवास्तव (चेयरमैन, केएमसी एवं आईटीएम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस) ने अपने संदेश में कहा कि स्वास्थ्य शिक्षा में कौशल-आधारित प्रशिक्षण समय की आवश्यकता है। संरक्षकों में डॉ. संकल्प द्विवेदी (डीन), डॉ. यू. भानु प्रिया (प्राचार्य), श्री राज कुमार (उप-प्राचार्य) एवं डॉ. डी.के. कुशवाहा (विभागाध्यक्ष, फिजियोथेरेपी) की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया।
आयोजन समिति में डॉ. शिवम वर्मा (संयोजक), डॉ. नितीश पांडेय (सह-संयोजक), डॉ. मधु उपाध्याय (आयोजन सचिव) तथा डॉ. पूजा यादव (संयुक्त सचिव) ने समन्वय एवं व्यवस्थापन की जिम्मेदारी का सफल निर्वहन किया।
प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र, अध्ययन सामग्री एवं प्रशिक्षण किट प्रदान की गई। साथ ही भोजन एवं अल्पाहार की समुचित व्यवस्था की गई। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ न केवल चिकित्सकीय दक्षता को सुदृढ़ करती हैं, बल्कि क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

