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गणतंत्र दिवस पर अभय जैन ग्रंथालय में हुआ विशेष कार्यक्रम। 

गणतंत्र दिवस पर अभय जैन ग्रंथालय में हुआ विशेष कार्यक्रम।

विजय कपूर की रिपोर्ट

बीकानेर : 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अभय जैन ग्रंथालय में एक गरिमामय एवं विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व गुरुदीप आश्रम, जयपुर के महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी जी रहे। सर्वप्रथम मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण किया गया, जिसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि गणतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं बल्कि चेतना, संस्कृति और ज्ञान परंपरा की रक्षा का संकल्प है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियाँ हमारी आत्मा हैं, जिनमें वेद, दर्शन, विज्ञान, आयुर्वेद और सामाजिक मूल्यों का अमूल्य ज्ञान सुरक्षित है। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से कट जाएँगी। उन्होंने पांडुलिपि संरक्षण को राष्ट्र सेवा का कार्य बताते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग से इसमें सहभागिता का आह्वान किया।इस अवसर पर अभय जैन ग्रंथालय के निदेशक ऋषभ नाहटा ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए अपने विचार रखे। उन्होंने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित ज्ञान भारतम् मिशन के माध्यम से ग्रंथालय में चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण, संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं शोध कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मिशन भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित कर उसे वैश्विक मंच तक पहुँचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।कार्यक्रम का संचालन मोहित बिस्सा द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम के दौरान गणतंत्र दिवस की भावना, भारतीय संविधान, सांस्कृतिक चेतना एवं पांडुलिपि संरक्षण जैसे विषयों पर सार्थक जोर दिया गया ।इस अवसर पर एडवकेट रविन्द्र बरडिया, डॉ. संदीप व्यास, लव कुमार देराश्री,नवरत्न चोपड़ा, मोहित बिस्सा, लक्ष्मी कांत उपाध्याय, गौरव आचार्य, जसवंत सिंह एवं वीरेंद्र सहित अनेक प्रबुद्धजन, शोधार्थी एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन भारतीय सांस्कृतिक धरोहर, ज्ञान परंपरा एवं पांडुलिपि संरक्षण को राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग मानते हुए उसे सुरक्षित रखने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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