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गोवा सरकार ने शुरू किया ग्रीन गोवा-क्लीन गोवा अभियान, 90 दिन में लगाए जाएंगे 10 लाख पौधे।

मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत बोले- “विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ चलना ज़रूरी, आज के फैसले तय करेंगे गोवा का भविष्य

 

संवाददाता

राहुल सरपाते की रिपोर्ट

पणजी, 5 जून 2026

 

गोवा में हरियाली का दायरा बढ़ाने और हरित गोवा का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सरकार ने बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने विश्व पर्यावरण दिवस पर पणजी में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यव्यापी ‘ग्रीन गोवा-क्लीन गोवा’ अभियान का शंखनाद किया। इस वर्ष की थीम ‘प्रकृति से प्रेरित:जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए’ है। इस अभियान के तहत राज्य सरकार अगले 90 दिनों में पूरे राज्यभर में 5 जून से 5 सितंबर के भीतर लगभग 0 लाख पेड़ लगाएगी।

 

जानकारी के अनुसार इस अभियान के तहत पत्रादेवी से पोलेम तक राष्ट्रीय राजमार्ग 66 (NH66) कॉरिडोर के किनारे सघन वृक्षारोपण किया जाएगा, जिससे आने वाले समय में एक भव्य ‘ग्रीन कॉरिडोर’ विकसित होगा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट 2025-2026 और ‘गोव्याचे कृषिनायक’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया।

 

पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GSPCB), गोवा वेस्ट मैनेजमेंट कॉर्पोरेशन (GWMC) और काकोरा सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत ‘डुअल सिस्टम ऑफ़ ट्रेनिंग’ के माध्यम से ‘वेस्ट मैनेजमेंट टेक्नीशियन’ कोर्स शुरू किया जाएगा, जो कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण के उद्देश्य से है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि यह सिर्फ वृक्षारोपण नहीं, भविष्य की नींव है। जब लोग 10 लाख पेड़ लगाने के बारे में सुनते हैं, तो वे इसे सिर्फ़ एक वृक्षारोपण अभियान समझते हैं। लेकिन यह उससे कहीं ज़्यादा बड़ा है। गोवा का भविष्य आज हमारे द्वारा लिए गए फैसलों पर निर्भर करता है। मैं हर नागरिक से अपील करता हूँ कि वे एक पेड़ लगाएं, उसकी देखभाल करें और उसकी रक्षा करें क्योंकि पर्यावरण की ज़िम्मेदारी हम सभी की है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री ने लोगों से ज़्यादा भागीदारी की अपील की और उद्योगों व कंपनियों को सीएसआर पहलों के ज़रिए इस अभियान में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि गोवा का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा हरियाली से आच्छादित है, साथ ही 25 वेटलैंड्स और 168 जल निकाय हैं। सरकार पेड़ लगाने, खज़ान ज़मीन को फिर से ठीक करने, टिकाऊ परिवहन और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन पर लगातार ध्यान दे रही है।

 

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि गोवा के सतत भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण और विकास को साथ-साथ चलना चाहिए। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण, कचरा प्रबंधन और पारिस्थितिक बहाली की दिशा में लगातार काम करने के लिए पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग, गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित एजेंसियों की तारीफ़ की। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा और टिकाऊ परिवहन पहलों में गोवा की प्रगति पर भी प्रकाश डाला और कहा कि राज्य पर्यावरण प्रशासन और जलवायु ज़िम्मेदारी के लिए एक मज़बूत मॉडल के रूप में उभर रहा है।

 

इस अवसर पर पोस्टर प्रतियोगिता, पर्यावरण क्विज़ प्रतियोगिता, इको शेफ चैंपियनशिप और फ़ोटोग्राफ़ी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार दिए गए। साथ ही उद्योगों और विभागों द्वारा पर्यावरण के क्षेत्र में किए गए बेहतरीन कामों के लिए भी पुरस्कार वितरित किए गए। कार्यक्रम के दौरान गोवा राज्य जैव विविधता बोर्ड के पुरस्कार भी दिए गए, जिसमें टिकाऊ खेती में योगदान के लिए प्रगतिशील किसान अक्षय पुरके और अमिता नाइक को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

 

इस कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य सदानंद शेत तनावड़े, राजस्व, श्रम और रोज़गार तथा कचरा प्रबंधन मंत्री अतानासियो मॉन्सेरेट; गोवा सरकार के मुख्य सचिव डॉ. वी. कंडावेलू (आईएएस), कुंबरजुआ निर्वाचन क्षेत्र के विधायक राजेश फल्देसाई; पणजी शहर निगम के मेयर रोहित मॉन्सेरेट, सेंट क्रूज़ निर्वाचन क्षेत्र के विधायक रुडोल्फ फर्नांडीस, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के निदेशक सचिन एस. देसाई, सरप्रीत सिंह गिल (आईएएस), गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. लेविंसन जे. मार्टिंस आईएएस, हरीश अडकोनकर, गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सदस्य सचिव डॉ. गीता नागवेंकर; गोवा राज्य जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. प्रदीप सरमोकदम और प्रधान मुख्य अभियंता संदीप चोडनेकर शामिल हुए। इनके साथ ही वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, पर्यावरणविद, छात्र, किसान और आम नागरिक भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

 

संवाददाता

राहुल सरपाते की रिपोर्ट

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