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आगामी 23 जनवरी को होने वाले माता सरस्वती की पूजा को ले कलाकार माता सरस्वती की मूर्ति बनाने में जोर-शोर से लगे हुए है.

आगामी 23 जनवरी को होने वाले माता सरस्वती की पूजा को ले कलाकार माता सरस्वती की मूर्ति बनाने में जोर-शोर से लगे  हुए है.

संवाददाता राजेन्द्र कुमार

राजापाकर /वैशाली

 

ज्ञात हो कि प्रखंड मुख्यालय के राजापाकर शनिचर हाट स्थित जनता पुस्तकालय के परिसर में मूर्ति कलाकारों द्वारा माता सरस्वती की विभिन्न आकृतियों में मूर्ति बनाई जाती है . यहां से पूरे प्रखंड क्षेत्र के श्रद्धालु मूर्ति खरीद कर ले जाते हैं .पूर्व में अपनी अपनी पसंद की मूर्तियां के लिए कलाकार को अग्रिम राशि जमा करते हैं. उसके बाद मूर्ति प्राप्त होती है .मूर्ति बनाने में गोरौल प्रखंड के मझिया ग्राम निवासी स्वर्गीय परीक्षण पंडित के पौत्र गोनौर पंडित ने बताया कि मेरा परिवार चार पीढ़ी से माता दुर्गा, माता लक्ष्मी ,सरस्वती सहित विभिन्न देवी देवताओं की मूर्ति बनाने का कार्य करती है. विभिन्न यज्ञ में भी विभिन्न देवी देवताओं, जानवरों की मूर्ति हमारे ही परिवार के सभी लोग बनाते हैं. प्रखंड मुख्यालय राजापाकर के प्रखंड क्षेत्र में भी इन्हीं के द्वारा दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा, सरस्वती पूजा के अवसर पर विभिन्न आकृतियों में आकर्षक मूर्तियां बनाई जाती है. इस कार्य में स्वर्गीय परीक्षण पंडित के वंशज गनौर पंडित, मुकेश पंडित, महेश पंडित, अशोक पंडित आदि लगे रहते हैं . वही गीनौर पंडित ने बताया कि पूर्व में हम लोग सौ से 5सौ तक में मूर्तियां बेचते थे. लेकिन मूर्ति बनाने के सभी सामानों के दाम बढ़ जाने से अब 1000 से 5000 तक की मूर्तियां बनाई जाती है .मजदूर भी पहले सौ में काम करते थे. अब प्रतिदिन 500 से 1000 रुपए वाले मजदूर कार्य करते हैं. महंगाई भी काफी बढ़ गई है. इसलिए मजदूर एवं सामानों के दाम के हिसाब से मूर्तियों की दाम बढ़ गई है. इसी कार्य से भी अपने परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं. हमारे परिवार के कोई भी लोग नौकरी या अन्य पेशा में नहीं है. सभी लोग इसी मूर्ति निर्माण कला से जुड़े हुए हैं.

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