जनहित का मुद्दा: छोटे उद्यमियों के साथ अलग नियम क्यों?

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देश में अक्सर यह चर्चा होती है कि बड़े उद्योगपतियों के ऋणों का पुनर्गठन, समझौता (सेटलमेंट) या अन्य बैंकिंग प्रक्रियाओं के माध्यम से उन्हें दोबारा बड़े ऋण उपलब्ध हो जाते हैं। वहीं, दूसरी ओर अनेक छोटे उद्यमियों का कहना है कि यदि उनका ऋण किसी कारणवश सेटल हो गया हो या उनका सिबिल स्कोर खराब हो गया हो, तो उन्हें नया ऋण प्राप्त करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

कई आवेदकों का यह भी आरोप है कि अच्छे सिबिल स्कोर होने के बावजूद कुछ बैंक शाखाओं में उन्हें यह कहकर वापस कर दिया जाता है कि प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना बंद कर दी गई है। यदि ऐसा कहा जा रहा है, तो संबंधित बैंकों द्वारा इसका आधार और आधिकारिक आदेश सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

जनहित में यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि:

क्या प्रधानमंत्री मुद्रा योजना वास्तव में बंद की गई है?

यदि नहीं, तो पात्र आवेदकों को ऋण देने में अनावश्यक बाधाएं क्यों उत्पन्न की जा रही हैं?

क्या छोटे और बड़े उधारकर्ताओं के लिए बैंकिंग व्यवहार में समानता सुनिश्चित की जा रही है?

भारत सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक, वित्त मंत्रालय तथा सभी बैंकिंग संस्थानों से अपेक्षा है कि इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर पात्र छोटे उद्यमियों को पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

— रत्नेश्वर कुमार

ब्यूरो चीफ, महराजगंज

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मो.: 9935252106

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