भोपाल
भेल के रामलीला मैदान भोपाल में “श्रमश्री” सेवा समिति.के द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा

में आज अंतरास्ट्रीय कथाकार एवं समाज सुधारक आचार्य मनोज अवस्थी जी महाराज ने बताया कि भोजन को हमेशा प्रसाद बुद्धि से खाना चाहिए जब हम उसे प्रसाद समझ कर खाएंगे तो वह हमारे बुद्धि में सद विचारों का निर्माण करेगा आगे आज महाराज श्री ने महारास की कथा को सुनाया और कहा भगवान् से गोपियों ने अनूठा अद्भुत एवं. अकल्पनीय प्रेम किया जिस तरह से गोपियों ने भगवान से प्रेम किया ठीक उसी प्रकार से हमें भी परमात्मा से प्रेम करना चाहिए, आचार्य जी ने कहा कि हम भगवान् को प्रेम से ही पा सकते है और प्रेम के सहारे. ही हम उस परमात्मा के पास पहुंच सकते है.आगे उन्होंने कहा कि हम भगवान् के प्रेम को मान ले तो हम उसे जान जायेंगे और अगर जान ले तो मान जायेंगे आगे आचार्य श्री ने महारास और कंश वध का सुन्दर वर्णन करते हुए कहा हमें सभी जगह परमात्मा का दर्शन करना चाहिए जब हम सब में भगवान् को ही देखेंगे तो हम उस परमात्मा के पास तक अवश्य पहुच जायेंगे कंश ने भी मरने से पहले सब जगह भगवान् का दर्शन किया इसलिए उसकी भी मुक्ति हो गई आगे महाराज जी ने कहा किसी की मदद करने के बाद उससे कुछ लेना नहीं चाहिए भगवान् ने भी मथुरा के राज्य को नहीं लिया और उसे अपने नाना उग्रशेन जी को दे दिया इसके बाद भगवान् पढ़ने के लिए उज्जैन गये और भगवान ने भी गुरु जी से ज्ञान लिया पूज्य श्री ने बताया कि गुरु हमारे अंदर व्याप्त अंधकार को हटाकर ज्ञान रुपी ज्योति जलाकर हमें परमात्मा की प्राप्ति करा देते है।आगे मगराज जी ने बताया कि भारत में गुरुमुखी ज्ञान को वरीयता दी जाती है भगवान् ने सब कुछ जानते हुए भी गुरु जी से ही ज्ञान लिया, आगे भगवान् और जरासंद के युद्ध के वर्णन के साथ उद्धव गोपियों. के संवाद को सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए
रविन्द्र तिवारी
भारतवर्ष समाचार
भोपाल






